शोध-सार कठोपनिषद मात्र एक आध्यात्मिक या दार्शनिक ग्रंथ नहीं है, अपितु यह मानव चेतना और संचार-प्रक्रिया का एक अत्यंत परिष्कृत मैनुअल है। यह शोध पत्र कठोपनिषद (कृष्ण यजुर्वेद की कठ शाखा) में निहित यम-नचिकेता संवाद का आधुनिक संचार सिद्धांतों के आलोक में विश्लेषण करता है। जहाँ पश्चिमी संचार मॉडल (जैसे शैनन-वीवर का SMCR मॉडल) सूचना के भौतिक हस्तांतरण तक सीमित हैं, वहीं कठोपनिषद चेतना के हस्तांतरण पर बल देता है। यह अध्ययन अन्वेषण करता है कि कैसे उपनिषद में अंतर्वैयक्तिक संचार रथ रूपक के माध्यम से, (पारस्परिक संचार – गुरु-शिष्य…
Read MoreCategory: संस्कृतिस्रोतः (Saṃskṛtisrotaḥ)
छत्तीसगढ़ के आरंभिक शैव मठ एवं शैवाचार्य एक आभिलेखिक अध्ययन
आधुनिक छत्तीसगढ़ जिसे प्राचीन काल में दक्षिण कोसल कहा जाता था, लगभग चौथी –पाँचवी शती ईस्वी से ही शैव धर्म के एक महत्त्वपूर्ण क्षेत्र के रूप में प्रचलित रहा। यहाँ से प्राप्त सैकड़ों शैव मूर्तियों, चार दर्जन से भी अधिक शैव मंदिरों तथा मौद्रिक एवं आभिलेखिक साक्ष्यों की पर्याप्त उपस्थिति से भी प्राचीन छत्तीसगढ़ में शैव धर्म के व्यापक प्रचलन की पुष्टि होती है। इनमें से आभिलेखिक स्रोत यहाँ की शैव परम्परा की सर्वाधिक प्रामाणिक सूचनाएं उपलब्ध कराते हैं। अभिलेखों से प्राप्त सूचनाओं के आधार पर ज्ञात होता है कि…
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