गोस्वामी तुलसीदास हिंदी साहित्य के आकाश के वह जाज्वल्यमान सूर्य हैं, जिन्होंने अपनी लेखनी से न केवल राम-कथा को जन-जन तक पहुँचाया, बल्कि मध्यकालीन भारत में भक्ति और मर्यादा का एक नया आदर्श स्थापित किया। उनके द्वारा रचित ‘रामचरितमानस’ आज भी भारतीय संस्कृति का आधार स्तंभ माना जाता है। जन्म और प्रारंभिक जीवन : तुलसीदास जी के जन्म के समय और स्थान को लेकर विद्वानों में मतभेद है, परंतु अधिकांश विद्वान उनका जन्म संवत् 1589 (1532 ईस्वी) के आसपास मानते हैं। उनके जन्मस्थान के रूप में उत्तर प्रदेश के चित्रकूट…
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अखाड़ा परिषद: एकता और धर्म का संगम
कुंभ मेले का आयोजन भारतीय संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है, जिसमें सनातन परंपरा के विभिन्न साधु-संन्यासी एकत्र होते हैं,अखाड़ों का इतिहास प्राचीन है, इसकी स्थापना आदिगुरु शंकराचार्य ने की थी,शंकराचार्य ने दशनामी परंपरा के अंतर्गत संन्यासी अखाड़ों की स्थापना की, जो न केवल आध्यात्मिक बल्कि शारीरिक रक्षा में भी निपुण थे।आजाद भारत में आयोजित पहले कुंभ मेले में भगदड़ के कारण अनेक लोगों की जान गई जिस कारण सरकार ने कुंभ के आयोजन हेतु एक अखाड़ा परिषद का स्थापना 1954 में किया, कुंभ में अखाड़ों का विशेष महत्व होता है,…
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