हितोपदेश की नीति-दृष्टि एवं वर्तमान बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था

सार :- भारतीय ज्ञान परंपरा में नीति, कूटनीति एवं राज्य-व्यवस्था संबंधी विचार केवल सैद्धांतिक नहीं, बल्कि अत्यंत व्यवहारिक एवं रणनीतिक रहे हैं। हितोपदेश ऐसा ही एक महत्वपूर्ण ग्रंथ है, जिसमें मित्रता, शक्ति-संतुलन, संधि, संघर्ष, राजनीतिक व्यवहार एवं रणनीतिक बुद्धिमत्ता जैसे तत्व कथाओं एवं नीति-वचनों के माध्यम से प्रस्तुत किए गए हैं। प्रस्तुत शोधपत्र का उद्देश्य हितोपदेश की नीति-दृष्टि का वर्तमान बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था के संदर्भ में विश्लेषण करना है। आज की वैश्विक राजनीति, जो शक्ति-संतुलन, सामरिक प्रतिस्पर्धा, क्षेत्रीय गठबंधनों एवं बहुस्तरीय कूटनीति से प्रभावित है, उसमें प्राचीन भारतीय नीति चिंतन…

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हिन्दू वैदिक सिद्धांतों में सतत विकास लक्ष्यों की झलक

शोध सार :-  वर्तमान में वैश्विक समुदाय मानवजनित पर्यावरणीय ह्रास के एक अभूतपूर्व संकट का सामना कर रहा है, जिसे वैज्ञानिक एन्थ्रोपोसीन युग की संज्ञा देते हैं । उपभोग केंद्रित जीवनशैली और अनियंत्रित आर्थिक विकास ने पृथ्वी के पारिस्थितिकी तंत्र को गंभीर रूप से संकटग्रस्त कर दिया है । इस वैश्विक संकट के समाधान हेतु, संयुक्त राष्ट्र ने 17 सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) का निर्धारण किया है, जिनका लक्ष्य 2030 तक गरीबी उन्मूलन, जलवायु परिवर्तन का सामना करने और असमानता को समाप्त करते हुए शांति व समृद्धि सुनिश्चित करना है…

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