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Friday, August 21, 2026
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  • May 18, 2026 websastra 0
    भारतीय ज्ञान परंपरा में वैज्ञानिक दृष्टि: तर्क, अनुभव और प्रयोग की अनवरत परंपरा
    भारतीय ज्ञान परंपरा को प्रायः आध्यात्मिकता, धर्म और दर्शन की दृष्टि से...
    Featured तत्त्वबोधिनी (Tattvabodhinī) 
  • May 18, 2026 websastra 0
    Reimagining Vedic Ecology Through Artificial Intelligence
    Reimagining Vedic Ecology Through Artificial Intelligence
    Featured युगसंवादः (Yugasaṃvādaḥ) 
  • May 18, 2026 websastra 0
    भाषा और संचार शिक्षा का अंतर्संबंध
    सामाजिक प्राणी होने के नाते मनुष्य स्वभावतः अपन भाव, अपने विचार दूसरे...
    Featured राष्ट्रायनम् (Rāṣṭrāyanam) 
जनजातीय समाज में त्यौहार और उत्सव संबंधी परंपराएँ

जनजातीय समाज में त्यौहार और उत्सव...

July 1, 2026 0

ऋतदृष्टि (Ṛtadṛṣṭi)

  • July 4, 2026 Sumit Rai 0

    ऋग्वेद और मनुस्मृति में द्यूत (जुआ): धार्मिक, नैतिक और सामाजिक दृष्टिकोण

    सारांश आज की वर्तमान परिस्थिति को देखकर प्राचीन समय में लोगों का धार्मिक, नैतिक और सामाजिक दृष्टिकोण कैसा रहा होगा उसका बीज वैदिक साहित्य में और स्मृति ग्रंथों में दृष्टिगत होता है, प्राचीन समय में जुआ के बारे में निकृष्ट बाते कही जाती रही है। प्रस्तावना: वैदिक काल...
    ऋतदृष्टि (Ṛtadṛṣṭi) 

तत्त्वबोधिनी (Tattvabodhinī)

  • रामायण की मार्क्सवादी साहित्यिक आलोचना की समीक्षा

    July 1, 2026 Sumit Rai 0

    रामायण की मार्क्सवादी साहित्यिक आलोचना की समीक्षा

    शोध सार यह शोध पत्र रामायण की मार्क्सवादी साहित्यिक आलोचना की आलोचनात्मक समीक्षा करता है। मार्क्सवादी साहित्यिक आलोचना ऐतिहासिक भौतिकवाद, वर्ग- संघर्ष और अर्थ आधारित अधिरचना की अवधारणाओं पर आधारित है जो ग्रंथों को प्रायः वैचारिक और सत्ता संबंधी उत्पाद के रूप में देखता है। इसी दृष्टि से...
    तत्त्वबोधिनी (Tattvabodhinī) 
  • May 18, 2026 websastra 0

    भारतीय ज्ञान परंपरा में वैज्ञानिक दृष्टि: तर्क, अनुभव और प्रयोग की अनवरत परंपरा

    भारतीय ज्ञान परंपरा को प्रायः आध्यात्मिकता, धर्म और दर्शन की दृष्टि से देखा जाता रहा है,...
    Featured तत्त्वबोधिनी (Tattvabodhinī) 
  • योग का सांस्कृतिक अनुकूलन और सांस्कृतिक विनियोगः एक डीकॉलोनियल अध्ययन

    May 18, 2026 websastra 0

    योग का सांस्कृतिक अनुकूलन और सांस्कृतिक विनियोगः एक डीकॉलोनियल अध्ययन

    सारांश :-  योग भारतीय सभ्यता की एक प्राचीन, सुदृढ़ और निरन्तर विकसित होती हुई ज्ञान-परम्परा है।...
    तत्त्वबोधिनी (Tattvabodhinī) 

कालचिंतनम् (Kālacintanam)

  • May 18, 2026 websastra 0

    हितोपदेश की नीति-दृष्टि एवं वर्तमान बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था

    सार :- भारतीय ज्ञान परंपरा में नीति, कूटनीति एवं राज्य-व्यवस्था संबंधी विचार केवल सैद्धांतिक नहीं, बल्कि अत्यंत व्यवहारिक एवं रणनीतिक रहे हैं। हितोपदेश ऐसा ही एक महत्वपूर्ण ग्रंथ है, जिसमें मित्रता, शक्ति-संतुलन, संधि, संघर्ष, राजनीतिक व्यवहार एवं रणनीतिक बुद्धिमत्ता जैसे तत्व कथाओं एवं नीति-वचनों के माध्यम से प्रस्तुत...
    कालचिंतनम् (Kālacintanam) 
  • May 18, 2026 websastra 0

    हिन्दू वैदिक सिद्धांतों में सतत विकास लक्ष्यों की झलक

    शोध सार :-  वर्तमान में वैश्विक समुदाय मानवजनित पर्यावरणीय ह्रास के एक अभूतपूर्व संकट का सामना...
    कालचिंतनम् (Kālacintanam) 

लोकायतनम् (Lokāyatanam)

  • July 1, 2026 Sumit Rai 0

    जनजातीय समाज में त्यौहार और उत्सव संबंधी परंपराएँ

    प्रस्तावना भारत विविध संस्कृतियों, परंपराओं और जीवन-शैलियों का देश है। यहाँ अनेक प्रकार की जनजातियाँ निवास करती हैं, जिनकी अपनी अलग सांस्कृतिक पहचान, भाषा, विश्वास और जीवन-पद्धति है। जनजातीय समाज का जीवन प्रकृति से गहरे रूप से जुड़ा हुआ है। उनके त्यौहार, उत्सव और परंपराएँ प्रकृति, कृषि, ऋतु...
    लोकायतनम् (Lokāyatanam) 

राष्ट्रायनम् (Rāṣṭrāyanam)

  • June 30, 2026 Sumit Rai 0

    हिमालयी सीमाओं के मौन वास्तुकार: रियाज़ डीन की मैपिंग द ग्रेट गेम के आलोक में भारतीय पंडित सर्वेक्षकों का पुनर्मूल्यांकन

    सारांश हिमालय की मानचित्रण-परंपरा का इतिहास अधिकांश ब्रिटिश सर्वेक्षकों के कार्यों पर केंद्रित रहता है, जबकि भारतीय पंडित सर्वेक्षकों के प्रयासों को अक्सर नज़रअंदाज़ कर दिया जाता है। रियाज़ डीन की पुस्तक मैपिंग द ग्रेट गेम (2019) का उपयोग करते हुए यह लेख तिब्बत और हिमालयी सीमांत के...
    राष्ट्रायनम् (Rāṣṭrāyanam) 
  • May 18, 2026 websastra 0

    भाषा और संचार शिक्षा का अंतर्संबंध

    सामाजिक प्राणी होने के नाते मनुष्य स्वभावतः अपन...
    Featured राष्ट्रायनम् (Rāṣṭrāyanam) 

संस्कृतिस्रोतः (Saṃskṛtisrotaḥ)

  • June 18, 2026 Sumit Rai 0

    कठोपनिषद का संचार-शास्त्रीय विश्लेषण – अंतर्वैयक्तिक, पारस्परिक और परा-संचार के विविध आयाम

    शोध-सार ​कठोपनिषद मात्र एक आध्यात्मिक या दार्शनिक ग्रंथ नहीं है, अपितु यह मानव चेतना और संचार-प्रक्रिया का एक अत्यंत परिष्कृत मैनुअल है। यह शोध पत्र कठोपनिषद (कृष्ण यजुर्वेद की कठ शाखा) में निहित यम-नचिकेता संवाद का आधुनिक संचार सिद्धांतों के आलोक में विश्लेषण करता है। जहाँ पश्चिमी संचार...
    संस्कृतिस्रोतः (Saṃskṛtisrotaḥ) 
  • May 18, 2026 websastra 0

    छत्तीसगढ़ के आरंभिक शैव मठ एवं शैवाचार्य एक आभिलेखिक अध्ययन

    आधुनिक छत्तीसगढ़ जिसे प्राचीन काल में दक्षिण कोसल...
    संस्कृतिस्रोतः (Saṃskṛtisrotaḥ) 

ग्रंथदीपिका (Granthadīpikā)

  • July 17, 2026 Sumit Rai 2

    Mimaṃsa Principles in Modern Indian Statutory Law

    Writer – Ujjawal MA Hindu studies ( university of delhi) INTRODUCTION Mīmāṃsā one of six orthodox darśanas (schools of Indian philosophy) whose original purpose was to reconcile contradictory Vedic injunction (vidhi), to arbitrate between ritual and duty as described in Jaimini’s Mīmāṃsā Sūtra (600-400 BCE) and later in...
    ग्रंथदीपिका (Granthadīpikā) 

आचार्यपरम्परा (Ācāryaparamparā)

  • July 28, 2026 Sumit Rai 0

    लोकनायक गोस्वामी तुलसीदास: एक कालजयी व्यक्तित्व

    गोस्वामी तुलसीदास हिंदी साहित्य के आकाश के वह जाज्वल्यमान सूर्य हैं, जिन्होंने अपनी लेखनी से न केवल राम-कथा को जन-जन तक पहुँचाया, बल्कि मध्यकालीन भारत में भक्ति और मर्यादा का एक नया आदर्श स्थापित किया। उनके द्वारा रचित ‘रामचरितमानस’ आज भी भारतीय संस्कृति का आधार स्तंभ माना जाता...
    आचार्यपरम्परा (Ācāryaparamparā) 
  • May 29, 2026 Sumit Rai 0

    अखाड़ा परिषद: एकता और धर्म का संगम

    कुंभ मेले का आयोजन भारतीय संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है, जिसमें सनातन परंपरा के विभिन्न साधु-संन्यासी...
    आचार्यपरम्परा (Ācāryaparamparā) 

धर्मसंवादः (Dharmasaṃvādaḥ)

  • August 13, 2026 Sumit Rai 0

    सनातन धर्म : मानवता, संस्कृति और आध्यात्मिकता का शाश्वत प्रकाश

    धर्मो रक्षति रक्षितः – यह केवल एक वाक्य नहीं, बल्कि भारतीय जीवन-दर्शन का मूल सिद्धांत है। सनातन धर्म संसार की उन प्राचीनतम आध्यात्मिक परम्पराओं में से है, जिसने मानव जीवन को केवल पूजा-पद्धति तक सीमित न रखकर उसे सत्य, करुणा, आत्मानुशासन और लोकमंगल के साथ जोड़ा। सनातन का...
    धर्मसंवादः (Dharmasaṃvādaḥ) 

नारीतत्त्वम् (Nārītattvam)

  • July 15, 2026 websastra 2

    Ardhanārīśvara – The Divine Union of Shiva and Shakti 

    Abstract The concept of Ardhanārīśvara, the half-male and half-female form of Lord Shiva and Goddess Pārvatī, probably is one of the most greatest ideas ever to originate in Bhartiya philosophy; it represnts the universal balance between masculine and feminine powers. This paper will try to discover the Philosophical,...
    नारीतत्त्वम् (Nārītattvam) 

युगसंवादः (Yugasaṃvādaḥ)

  • June 30, 2026 Sumit Rai 0

    Sarve Bhavantu Sukhinah and Lokamaṅgala as an Indigenous Public Administrative Paradigm

    Abstract The concept of the Pursuit of Happiness, as expressed within the American constitutional framework, has significantly shaped contemporary political discourse by emphasizing individual freedom and personal welfare as fundamental goals of governance. Nevertheless, the increasing crises of the twenty-first century, such as armed conflicts, growing inequalities, climate...
    युगसंवादः (Yugasaṃvādaḥ) 
  • May 18, 2026 websastra 0

    Reimagining Vedic Ecology Through Artificial Intelligence

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    भारतीय ज्ञान परंपरा में वैज्ञानिक दृष्टि: तर्क, अनुभव और प्रयोग की अनवरत परंपरा

    भारतीय ज्ञान परंपरा को प्रायः आध्यात्मिकता, धर्म और दर्शन की दृष्टि से देखा जाता रहा है, किंतु यदि इसके मूल स्रोतों, विचार पद्धतियों और ज्ञान संरचनाओं का गंभीर अध्ययन किया जाए तो यह स्पष्ट रूप से समझ में आता है कि यह परंपरा केवल आध्यात्मिक अनुभूति पर आधारित...
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    आधुनिक छत्तीसगढ़ जिसे प्राचीन काल में दक्षिण कोसल कहा जाता था, लगभग चौथी –पाँचवी शती ईस्वी...
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