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Sunday, June 21, 2026
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  • भारतीय ज्ञान परंपरा में वैज्ञानिक दृष्टि: तर्क, अनुभव और प्रयोग की अनवरत परंपरा
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  • May 18, 2026 websastra 0
    भारतीय ज्ञान परंपरा में वैज्ञानिक दृष्टि: तर्क, अनुभव और प्रयोग की अनवरत परंपरा
    भारतीय ज्ञान परंपरा को प्रायः आध्यात्मिकता, धर्म और दर्शन की दृष्टि से...
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    Reimagining Vedic Ecology Through Artificial Intelligence
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    भाषा और संचार शिक्षा का अंतर्संबंध
    सामाजिक प्राणी होने के नाते मनुष्य स्वभावतः अपन भाव, अपने विचार दूसरे...
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तत्त्वबोधिनी (Tattvabodhinī)

  • May 18, 2026 websastra 0

    भारतीय ज्ञान परंपरा में वैज्ञानिक दृष्टि: तर्क, अनुभव और प्रयोग की अनवरत परंपरा

    भारतीय ज्ञान परंपरा को प्रायः आध्यात्मिकता, धर्म और दर्शन की दृष्टि से देखा जाता रहा है, किंतु यदि इसके मूल स्रोतों, विचार पद्धतियों और ज्ञान संरचनाओं का गंभीर अध्ययन किया जाए तो यह स्पष्ट रूप से समझ में आता है कि यह परंपरा केवल आध्यात्मिक अनुभूति पर आधारित...
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  • योग का सांस्कृतिक अनुकूलन और सांस्कृतिक विनियोगः एक डीकॉलोनियल अध्ययन

    May 18, 2026 websastra 0

    योग का सांस्कृतिक अनुकूलन और सांस्कृतिक विनियोगः एक डीकॉलोनियल अध्ययन

    सारांश :-  योग भारतीय सभ्यता की एक प्राचीन, सुदृढ़ और निरन्तर विकसित होती हुई ज्ञान-परम्परा है।...
    तत्त्वबोधिनी (Tattvabodhinī) 

कालचिंतनम् (Kālacintanam)

  • May 18, 2026 websastra 0

    हितोपदेश की नीति-दृष्टि एवं वर्तमान बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था

    सार :- भारतीय ज्ञान परंपरा में नीति, कूटनीति एवं राज्य-व्यवस्था संबंधी विचार केवल सैद्धांतिक नहीं, बल्कि अत्यंत व्यवहारिक एवं रणनीतिक रहे हैं। हितोपदेश ऐसा ही एक महत्वपूर्ण ग्रंथ है, जिसमें मित्रता, शक्ति-संतुलन, संधि, संघर्ष, राजनीतिक व्यवहार एवं रणनीतिक बुद्धिमत्ता जैसे तत्व कथाओं एवं नीति-वचनों के माध्यम से प्रस्तुत...
    कालचिंतनम् (Kālacintanam) 
  • May 18, 2026 websastra 0

    हिन्दू वैदिक सिद्धांतों में सतत विकास लक्ष्यों की झलक

    शोध सार :-  वर्तमान में वैश्विक समुदाय मानवजनित पर्यावरणीय ह्रास के एक अभूतपूर्व संकट का सामना...
    कालचिंतनम् (Kālacintanam) 

राष्ट्रायनम् (Rāṣṭrāyanam)

  • May 18, 2026 websastra 0

    भाषा और संचार शिक्षा का अंतर्संबंध

    सामाजिक प्राणी होने के नाते मनुष्य स्वभावतः अपन भाव, अपने विचार दूसरे मनुष्य तक पहुँचाता और दूसरे के भावों को स्वयं समझना चाहता है। इसके लिए वह जिन माध्यमों को अपनाता है, भाषा उनमें सबसे अधिक महत्त्वपूर्ण है। मानव के क्रियाकलापों और व्यवहार का साधन, उसकी प्रत्येक वाचिक...
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संस्कृतिस्रोतः (Saṃskṛtisrotaḥ)

  • June 18, 2026 Sumit Rai 0

    कठोपनिषद का संचार-शास्त्रीय विश्लेषण – अंतर्वैयक्तिक, पारस्परिक और परा-संचार के विविध आयाम

    शोध-सार ​कठोपनिषद मात्र एक आध्यात्मिक या दार्शनिक ग्रंथ नहीं है, अपितु यह मानव चेतना और संचार-प्रक्रिया का एक अत्यंत परिष्कृत मैनुअल है। यह शोध पत्र कठोपनिषद (कृष्ण यजुर्वेद की कठ शाखा) में निहित यम-नचिकेता संवाद का आधुनिक संचार सिद्धांतों के आलोक में विश्लेषण करता है। जहाँ पश्चिमी संचार...
    संस्कृतिस्रोतः (Saṃskṛtisrotaḥ) 
  • May 18, 2026 websastra 0

    छत्तीसगढ़ के आरंभिक शैव मठ एवं शैवाचार्य एक आभिलेखिक अध्ययन

    आधुनिक छत्तीसगढ़ जिसे प्राचीन काल में दक्षिण कोसल...
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आचार्यपरम्परा (Ācāryaparamparā)

  • May 29, 2026 Sumit Rai 0

    अखाड़ा परिषद: एकता और धर्म का संगम

    कुंभ मेले का आयोजन भारतीय संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है, जिसमें सनातन परंपरा के विभिन्न साधु-संन्यासी एकत्र होते हैं,अखाड़ों का इतिहास प्राचीन है, इसकी स्थापना आदिगुरु शंकराचार्य ने की थी,शंकराचार्य ने दशनामी परंपरा के अंतर्गत संन्यासी अखाड़ों की स्थापना की, जो न केवल आध्यात्मिक बल्कि शारीरिक रक्षा में...
    आचार्यपरम्परा (Ācāryaparamparā) 

युगसंवादः (Yugasaṃvādaḥ)

  • May 18, 2026 websastra 0

    Reimagining Vedic Ecology Through Artificial Intelligence

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Recents Posts

  • June 18, 2026 Sumit Rai 0

    कठोपनिषद का संचार-शास्त्रीय विश्लेषण – अंतर्वैयक्तिक, पारस्परिक और परा-संचार के विविध आयाम

    शोध-सार ​कठोपनिषद मात्र एक आध्यात्मिक या दार्शनिक ग्रंथ नहीं है, अपितु यह मानव चेतना और संचार-प्रक्रिया...
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  • May 29, 2026 Sumit Rai 0

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    भारतीय ज्ञान परंपरा में वैज्ञानिक दृष्टि: तर्क, अनुभव और प्रयोग की अनवरत परंपरा

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    भारतीय ज्ञान परंपरा में वैज्ञानिक दृष्टि: तर्क, अनुभव और प्रयोग की अनवरत परंपरा

    भारतीय ज्ञान परंपरा को प्रायः आध्यात्मिकता, धर्म और दर्शन की दृष्टि से देखा जाता रहा है, किंतु यदि इसके मूल स्रोतों, विचार पद्धतियों और ज्ञान संरचनाओं का गंभीर अध्ययन किया जाए तो यह स्पष्ट रूप से समझ में आता है कि यह परंपरा केवल आध्यात्मिक अनुभूति पर आधारित...
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राष्ट्रायनम् (Rāṣṭrāyanam)

  • May 18, 2026 websastra 0

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संस्कृतिस्रोतः (Saṃskṛtisrotaḥ)

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    कठोपनिषद का संचार-शास्त्रीय विश्लेषण – अंतर्वैयक्तिक, पारस्परिक और परा-संचार के विविध आयाम

    शोध-सार ​कठोपनिषद मात्र एक आध्यात्मिक या दार्शनिक ग्रंथ नहीं है, अपितु यह मानव चेतना और संचार-प्रक्रिया...
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    छत्तीसगढ़ के आरंभिक शैव मठ एवं शैवाचार्य एक आभिलेखिक अध्ययन

    आधुनिक छत्तीसगढ़ जिसे प्राचीन काल में दक्षिण कोसल कहा जाता था, लगभग चौथी –पाँचवी शती ईस्वी...
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कालचिंतनम् (Kālacintanam)

  • May 18, 2026 websastra 0

    हितोपदेश की नीति-दृष्टि एवं वर्तमान बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था

    सार :- भारतीय ज्ञान परंपरा में नीति, कूटनीति एवं राज्य-व्यवस्था संबंधी विचार केवल सैद्धांतिक नहीं, बल्कि...
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