प्रधान सम्पादक संदेश

अनन्त अनादि त्रैमासिक शोध पत्रिका उस शाश्वत भारतीय दृष्टि का प्रतिनिधित्व करती है, जिसके अनुसार ज्ञान न तो सीमित है और न ही उसका कोई अंतिम बिंदु है, अपितु यह सतत प्रवहमान, विकासशील एवं विश्वमानवता के कल्याण का मार्गदर्शक तत्व है। भारतीय ज्ञान परंपरा विशेष रूप में हिन्दू स्टडीज के मूल में जो अनंतता का भाव निहित है, वही इस पत्रिका के नाम और उद्देश्य दोनों का आधार है। उपनिषदों में कहा गया है – सत्यं ज्ञानमनन्तं ब्रह्म इसी अनंतता की अनुभूति और उसकी शोधपरक अभिव्यक्ति अनन्त अनादि का ध्येय है। आज का वैश्विक परिदृश्य अनेक प्रकार के संकटों से घिरा हुआ है – सांस्कृतिक विखंडन, पर्यावरणीय असंतुलन तथा नैतिक मूल्यों का ह्रास।
ऐसे समय में हिंदू अध्ययन (Hindu Studies) केवल एक अकादमिक विषय न होकर जीवन-दर्शन का वह समन्वित आयाम प्रस्तुत करता है, जो समरसता, संतुलन और सहअस्तित्व की भावना को पुष्ट करता है। ऋग्वेद का यह उद्घोष – संगच्छध्वं संवदध्वं सं वो मनांसि जानताम् हमें सामूहिकता, संवाद और वैचारिक एकात्मता की दिशा में प्रेरित करता है। अनन्त अनादि का उद्देश्य एक ऐसे उच्चस्तरीय बौद्धिक मंच का निर्माण करना है, जहाँ शास्त्रीय परंपरा और आधुनिक अकादमिक विमर्श का सुसंगत समन्वय स्थापित हो। यहाँ प्रकाशित होने वाले शोध-लेख न केवल वेद, उपनिषद, पुराण, दर्शन, लोकपरंपरा और सांस्कृतिक अध्ययन की गहनता को उद्घाटित करें बल्कि समकालीन समाज की जटिल समस्याओं के समाधान की दिशा में भी सार्थक योगदान दें। विशेष रूप से मैं हिंदू स्टडीज के विद्यार्थियों, शोधार्थियों और युवा विद्वानों से अपेक्षा करता हूं कि वे इस पत्रिका को केवल प्रकाशन का माध्यम न मानें बल्कि इसे एक वैचारिक साधना के रूप में ग्रहण करें। वे भारतीय ज्ञान परंपरा के विविध आयामों – दर्शन, धर्म, समाज, भाषा, लोकजीवन, पर्यावरण एवं सांस्कृतिक अध्ययन को नवीन दृष्टि से परखें, उन्हें प्रमाणिक स्रोतों के आधार पर विश्लेषित करें और वैश्विक अकादमिक मंच पर प्रतिष्ठित करने का प्रयास करें। भगवद्गीता का यह सूत्र “न हि ज्ञानेन सदृशं पवित्रमिह विद्यते” यह स्पष्ट करता है कि ज्ञान से बढ़कर कोई पवित्र तत्व नहीं है। अतः शोधार्थियों का यह दायित्व है कि वे ज्ञान की इस पवित्र परंपरा को सत्यनिष्ठा, तर्कसंगतता और शास्त्रीय प्रमाणिकता के साथ आगे बढ़ाएँ।
हमारा दीर्घकालिक लक्ष्य अनन्त अनादि को एक राष्ट्रीय ही नहीं अपितु अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतिष्ठित शोध पत्रिका के रूप में स्थापित करना है, जो हिंदुत्व को वैश्विक बौद्धिक विमर्श में सशक्त उपस्थिति प्रदान करे।
